Kepler-452b | Earth 2.0 Prithvi ka chachera bhai - FACTS-Vault

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Sunday, August 2, 2020

Kepler-452b | Earth 2.0 Prithvi ka chachera bhai

पृथ्वी का चचेरा भाई kepler-452b

Kepler 452b

Kepler-452bको पृथ्वी का चचेरा भाई और Earth 2.0 भी कहा जाता है|इसे कैपलर ऑब्जेक्ट ऑफ इंटरेस्ट डेसिग्नेशन KOI-7016.01 का दर्जा भी दिया गया है | यह गृह पृथ्वी की तरह ही सूर्य के चक्कर लगाता है जो 1402 लाइट ईयर्स दूर है अपनी पृथ्वी से | इस ग्रह की पहचान केप्लर टेलीस्कोप यानी दूरबीन से की गई थी जिसकी वजह से इसका नाम Kepler-452b रखा गया |

NASA


इसकी खोज नासा ने 23 जुलाई 2015 को की थी | स्टैटिसटिकली यानी संख्याकिया रूप से Mullally et al ne ने 2018 में अध्ययन से कहा गया कि kepler 452b मौजूद नहीं है और अभी भी इसे एक उम्मीदवार माना जाना चाहिए |

Kepler 452b

इसके अलावा 5 पृथ्वी द्रव्यमानो के द्रव्यमान से यह संभावना बढ़ जाती है कि यह ग्रह सुपर अर्थ की वजह एक मिनी नेप्चून है | यह पहला संभावित चट्टानी सुपर अर्थ ग्रह है|यह ग्रह सूर्य के सामान एक तारे के रहने योग्य क्षेत्र के भीतर की परिक्रमा करता है | सौर्य मंडल से यह ग्रह लगभग 1400 लाइट ईयर दूर है |

Kepler 452b

न्यू होराइजन अंतरिक्ष यान जो 59000 km/hr की गति से चलता है | उसको वहां पहुंचने में करीब 26 मिलियन वर्ष लगेंगे जिसका मतलब 2 करोड़ 60 लाख वर्ष लगेंगे kepler-452b तक जाने में |

अब हम बात कर करें इसके साइज और मास यानी द्रव्यमान की

तो kepler 452b का द्रव्यमान पृथ्वी से 5 गुना ज्यादा है | kepler 452b ग्रेविटी यानी गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी से 2 गुना है | यह सारी बातें एक अनुमान ही है इसका कोई ठोस सबूत नहीं है और हम निकाल भी नहीं पाएंगे | शायद अगले 2-30 सालों तक क्योंकि हमारे पास ऐसी कोई तकनीक ही नहीं है जो kepler-452b तक जाए और हमें यह सब चीजों के ठोस सबूत दे सके जिसे हम पूरी दुनिया के सामने पेश कर पाए |

Kepler orbit

kepler 452b को अपने तारों की परिक्रमा करने में 385 पृथ्वी के दिन लगते हैं | यह कुछ एक समान है पृथ्वी के जिसको 365 दिन लगते हैं | ऐसी कई बातें हैं जिसके वजह से kepler 452b को पृथ्वी का चचेरा भाई कहा जाता है और अधिक जानने के लिए नीचे पड़ते जाइए |

इसका त्रिजाइ यानी रेडियस पृथ्वी की तुलना में 50% बड़ा है यह अपने मूल तारे के रोटी वादे रहने योग्य क्षेत्र के भीतर स्थित है पृथ्वी की तुलना में kepler 452b के सतह का तापमान (120 °C; 248 °F) जो कुछ ज्यादा ही गर्म है इसके सतह पर कई सारे ज्वालामुखी है जो इस का तापमान बढ़ाते रहते हैं |

Kepler 452b

यह ग्रह कितना पुराना है?

हालांकि kepler 452b 2 बिलियन साल पुराना है हालांकि 6.5 बिलियन साल में चट्टानी ग्रह का पानी और वातावरण सबसे अधिक वासपित्त हो गया है | दूसरे शब्दों में कहें तो हम सिर्फ अनुमान ही लगा सकते हैं कि वहां पर इंसान रह पाएंगे और यह इंसानों के लायक ग्रह है |

जैसा कि आप सब जानते हैं कि भगवान जो एक बार बनाता है वह दूसरी बार कभी नहीं बना सकता|यह पृथ्वी भी और हमें भी भगवान ने ही बनाया है|पृथ्वी को संभालने के लिए शायद हम दिन पर दिन अपनी इंसानियत खोते जा रहे हैं | 

इसीलिए हमें इस सच को मानना ही पड़ेगा कि पृथ्वी के जैसा कोई और ग्रह कभी नहीं बन सकता है और ना कभी बन पाएगा और अगर बन भी गया तो हमारी यह ना कामयाबी होगी|क्योंकि हम अपनी पृथ्वी को संभाल ही नहीं पाए तभी हम एक दूसरी पृथ्वी के बारे में सोच रहे हैं | हम इंसानों की आदत होती है जब हमारे पास कुछ होता है तो हमें उसकी कदर नहीं होती पर जब वह चीज हमसे छिनली जाती है तब जाके हमें उस चीज़ का पछतावा और कदर भी होने लगती है |

अगर पृथ्वी जैसा दूसरा कोई ग्रह बन भी जाता है तो वह पृथ्वी के जैसा आराम दायक और इतना प्यारा वातावरण वाला नहीं होगा क्योंकि अगर हमें दूसरी जगह भगवान को भेजना ही था तो वह पहले ही भेज चुके होते | हमें ऐसे खूबसूरत जगह पर नहीं छोड़ा होत | तोह में बस आप सब से यही कहूंगा कि हमारे इस पृथ्वी को हमारी जरूरत है और हमें इस पृथ्वी की तो इसको हमें बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए | जो हमें दिन भर जीने के लिए ऑक्सीजन देता है हम अब उसी को ही खत्म करते जा रहे हैं तो कृपया करके इस बात को समझे और इस पोस्ट को इस आर्टिकल को सब जगह शेयर करें ताकि सबको पता चले कि हमारी पृथ्वी कितनी कीमती और नायाब है | 

"Prithvi Baacho , Pedh Lagaao "

" Save Earth , Save Tree "


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